“लिव-इन, धोखा और हत्या: महेंद्रगढ़ के हेड कांस्टेबल ने संगीता की गला घोंटकर ली जान”

🟨 1. जब वर्दीदार बना हत्यारा: हेड कांस्टेबल की गिरफ़्तारी से हरकत में पुलिस

गुरुग्राम पुलिस ने शुक्रवार को महेंद्रगढ़ के हेड कांस्टेबल रविंद्र को गिरफ्तार किया, जिस पर 24 वर्षीय महिला संगीता की हत्या का आरोप है। मामला सामने आते ही पुलिस महकमे में सनसनी फैल गई।

🟨 2. रिश्ते की मर्यादा टूटी, रिश्तेदार ने बनाया लिव-इन पार्टनर

मृतका संगीता, जिसके पति का 2 साल पहले निधन हो चुका था, अपने रिश्ते के जीजा रविंद्र के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी। यह रिश्ता शुरू हुआ “नौकरी लगवाने के भरोसे” से, लेकिन अंजाम हुआ हत्या से।

🟨 3. अपराध की पृष्ठभूमि: स्पोर्ट्स विला सोसाइटी बना मर्डर सीन

24 जुलाई को गुरुग्राम के सोहना इलाके की स्पोर्ट्स विला सोसाइटी के एक फ्लैट में संगीता मृत अवस्था में मिली। पुलिस को शव बिस्तर पर मिला — गले में गमछा पड़ा था, जो बाद में हत्या का हथियार साबित हुआ।

🟨 4. संगीता की पहचान और पारिवारिक संबंध

पुलिस पूछताछ में संगीता की पहचान राजस्थान के झुंझुनू जिले की रहने वाली के रूप में हुई। उसका पति सेना में था और उसकी मौत के बाद वह अपने जीजा रविंद्र के सम्पर्क में आई। रविंद्र हरियाणा पुलिस में सिपाही था और झूठे वादों से वह संगीता को अपने साथ रख लाया।

🟨 5. ईर्ष्या, शक और हत्या: क्या यही वजह बनी संगीता की मौत की?

जांच में सामने आया कि संगीता हाल के दिनों में अन्य लोगों के संपर्क में थी और उनके साथ बाहर घूमने गई थी। इसी बात से नाराज़ होकर रविंद्र और उसके बीच विवाद हुआ, और उसी झगड़े में आरोपी ने गमछे से उसका गला घोंट डाला।

🟨 6. हत्या के बाद आरोपी की भगोड़ा कहानी: उज्जैन से जयपुर तक

हत्या को अंजाम देने के बाद रविंद्र सबसे पहले मध्य प्रदेश के उज्जैन और फिर राजस्थान के जयपुर भाग गया। लेकिन पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर, आखिरकार सोहना की पलवल रोड पर दबोच लिया।

🟨 7. आरोपी का बैकग्राउंड: 2017 में हरियाणा पुलिस में भर्ती

रविंद्र 2017 से पुलिस सेवा में था और जिला पलवल में तैनात था। उसका इस तरह अपराध में लिप्त होना वर्दी की गरिमा और सुरक्षा संस्थानों पर भी सवाल खड़े करता है।

🟨 8. सवाल जो उठते हैं: लिव-इन का भरोसा या धोखा?

क्या लिव-इन जैसी व्यवस्था में सुरक्षा के नए खतरे हैं? क्या रिश्तों में आते बदलाव हत्या जैसे खतरनाक मोड़ लेने लगे हैं? इस केस ने समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

✅ निष्कर्ष

इस केस ने साबित कर दिया कि अपराधी का चेहरा वर्दी में भी छुपा हो सकता है। रिश्तों के नाम पर हो रहे अपराधों पर नज़र रखने और समय रहते कदम उठाने की ज़रूरत है।