📉 शेयर बाजार में भारी गिरावट
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड टेंशन के चलते गुरुवार, 7 अगस्त को शेयर मार्केट में ज़बरदस्त गिरावट देखने को मिली।
- BSE Sensex गिरा 335.71 पॉइंट्स, पहुंचा 80,208.28
- NSE Nifty गिरा 114.15 पॉइंट्स, पहुंचा 24,460.05
ट्रंप के इस नए टैरिफ ऐलान ने इनवेस्टर्स के सेंटिमेंट को बड़ा झटका दिया है।

US ट्रंप का फैसला और उसकी टाइमिंग
बुधवार को अमेरिका ने भारत से होने वाले एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया, जिससे भारत US के सबसे ज़्यादा टैक्स वाले ट्रेडिंग पार्टनर्स में शामिल हो गया है।
“अगर ये टैरिफ एक साल तक जारी रहते हैं, तो इससे भारत के GDP ग्रोथ पर 30–40 बेसिस पॉइंट्स का असर पड़ सकता है।”
— Dhiraj Relli, CEO, HDFC Securities (Reuters को दिए इंटरव्यू में)
📊 निवेशकों की चिंता और अनुमान
Gift Nifty Futures सुबह 7:05 बजे 24,586 पॉइंट्स पर ट्रेड कर रहे थे, जो मार्केट के फ्लैट-टू-नेगेटिव ओपनिंग का संकेत देते हैं।
डॉलर-रुपया स्थिर
टैरिफ इंपैक्ट के बावजूद, 1-महीने के डॉलर-रुपया NDF के अनुसार इंडियन करेंसी में कोई बड़ा बदलाव नहीं देखा गया।
📉 कौन-से सेक्टर्स होंगे सबसे ज़्यादा प्रभावित?
- टेक्सटाइल्स
- जेम्स एंड ज्वेलरी
- फार्मास्युटिकल्स
- ऑटो पार्ट्स
ये सभी सेक्टर्स भारी मात्रा में अमेरिका को एक्सपोर्ट करते हैं और टैरिफ के कारण इनकी मार्जिन्स पर असर पड़ सकता है।
🏦 आरबीआई का रुख
टैरिफ हाइक की अनाउंसमेंट से पहले, RBI ने अपना GDP ग्रोथ प्रोजेक्शन 6.5% पर बरकरार रखा था।
हालांकि अब निवेशक RBI के अगले स्टेप और गवर्नमेंट के डिप्लोमैटिक मूव्स पर नज़र रखे हुए हैं।
🌐 वैश्विक बाजारों में मिला-जुला असर
जबकि इंडियन मार्केट में गिरावट आई, वहीं एशियन शेयरों में रिकवरी देखने को मिली:
- MSCI Asia Index में 0.8% की तेजी
- S&P 500 और Nasdaq Futures में 0.3% की तेजी
- Nvidia, Samsung, TSMC जैसे चिप स्टॉक्स में उछाल
इसका एक कारण यह है कि ट्रंप ने चिप एक्सपोर्ट्स पर 100% टैरिफ की धमकी जरूर दी, लेकिन Apple जैसी US-इन्वेस्टिंग कंपनियों को छूट दी।

🔍 आगे क्या हो सकता है?
निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि:
- भारत और अमेरिका के बीच डिप्लोमैटिक बातचीत होगी
- टैरिफ्स को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है
- भारत अपने एक्सपोर्ट मार्केट को डाइवर्सिफाई करेगा
“अगर अमेरिका के साथ रिश्ते और बिगड़ते हैं, तो इससे इनवेस्टर्स की कॉन्फिडेंस पर सीधा असर पड़ेगा।”
— Nilesh Shah, CEO, Kotak AMC
✅ निष्कर्ष: अलर्ट रहें, पैनिक नहीं
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड टेंशन एक गंभीर मसला बनता जा रहा है, लेकिन निवेशकों को घबराने की बजाय स्मार्ट पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग-टर्म विज़न के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
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