‎”Army Soldier की Surgery ना करने की मर्जी से Disability Pension नहीं छिना जा सकता: Punjab & Haryana HC का बड़ा फैसला”‎

Punjab और Haryana High Court का Soldier के Disability Pension पर बड़ा नियम

Punjab और Haryana High Court ने एक बहुत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो सेना में सेवा दे चुके सैनिकों के लिए राहत लेकर आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर Army ने यह माना है कि एक सैनिक की surgery ना कराने की मर्जी उसके disability rating को प्रभावित नहीं करती, तो फिर सेना के अधिकारी उस मर्जी का हवाला देते हुए उसे disability pension से वंचित नहीं कर सकते हैं। यह फैसला Havildar Banta Singh के केस में आया, जिसने surgery से मना किया था लेकिन उसे इसका नुकसान नहीं भुगतना पड़ा।

मामला क्या था?

Havildar Banta Singh को सेना की Release Medical Board (RMB) ने सुझाव दिया था कि उनकी बीमारी का इलाज surgery से हो सकता है। पर Banta Singh ने अपने ट्रिटमेंट में surgery से मना कर दिया। उसके बाद जब Armed Forces Tribunal (AFT) ने disability pension मिलने का आदेश दिया, तो केंद्र सरकार ने इसे चुनौती दी।

सरकार का तर्क था कि अगर surgery कराई जाती तो समस्या ठीक हो सकती थी, अतः surgery से मना करने को आधार बनाकर डिसेबिलिटी पेंशन नहीं दी जानी चाहिए।

लेकिन सैनिक के वकील ने कोर्ट को बताया कि Armed Forces Medical Services (DGAFMS) ने अप्रैल 2019 में एक सर्कुलर जारी किया है, जिसमें surgery के जोखिमों को विस्तार से बताया गया है। ख़ासतौर पर spinal surgery से जीवन खतरे में पड़ सकता है। इसलिए, सैनिक का surgery से मना करना जायज है और उसे इसका नुकसान नहीं होना चाहिए।

Punjab और Haryana High Court का फैसला

कोर्ट ने AFT के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि अगर सेना की competent authority ने माना है कि surgery से इंकार करने से disability percentage पर असर नहीं पड़ता, तो इसे आधार बनाकर पेंशन से इनकार नहीं किया जा सकता।

इसके साथ ही, कोर्ट ने मेडिकल सर्कुलर को महत्व दिया, जो surgery से मना करने को reasonable refusal के रूप में मानता है, खासकर जब surgery जोखिमपूर्ण हो या disability पूरी तरह ठीक ना हो।

नौकरी से हुई चोट और डिसेबिलिटी पेंशन की जरूरत

सेना में सेवा करने वाले सैनिकों को अक्सर कई तरह की शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उन्हें मिलने वाली डिसेबिलिटी पेंशन उनकी सेवा के सम्मान और जीवन निर्वाह का सहारा बनती है।

‎Punjab और Haryana HC की पिछली महत्वपूर्ण रूलिंग्स में यह भी साफ किया गया है कि सैनिकों को मिलने वाली डिसेबिलिटी पेंशन को वित्तीय तंगी या अन्य तर्कों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। खासकर वे सैनिक जिनकी डिसेबिलिटी सेवा के दौरान या सेवा की वजह से हुई हो, उन्हें पूरी सुरक्षा मिलनी चाहिए.

क्या है Armed Forces Medical Services का Circular?

DGAFMS की 2019 की सर्कुलर कहती है कि अगर एक सैनिक surgery से मना करता है तो इसे तभी नकारा जाएगा जब मेडिकल अधिकारी इसे reasonableness से परखें।

‎जैसे surgery का असर disability सुधारने में संभव हो या न हो।

surgery में जिंदगी का खतरा हो।

‎या surgery से soldier के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की संभावना हो।

‎ऐसे में बिना soldier की मर्जी के उसे surgery के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और surgery से इंकार को पेंशन पर असर नहीं डालना चाहिए।

Khabarnama247 के पाठकों के लिए खास जानकारी

‎यह फैसला उन तमाम सैनिकों को बड़ा भरोसा देगा जो किसी कारणवश surgery नहीं कराना चाहते लेकिन उनकी डिसेबिलिटी पेंशन खतरे में हो सकती है। यह निर्णय सेना के सम्मानित जवानों के अधिकारों की सुरक्षा करता है और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ी पहल है।

अगर आप या आपके परिवार में कोई सैनिक है, तो ऐसे अधिकारों से अवगत होना और सही कानूनी सलाह लेना बहुत जरूरी है। Khabarnama247 हमेशा ऐसी अहम जानकारियों से आपको अपडेट रखेगा।

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नोट: इस फैसले ने सेना के घायल और दिव्यांग सैनिकों के अधिकारों को मजबूत किया है, और आने वाले समय में ऐसे और फैसलों की उम्मीद बनी रहेगी।