हरियाणा बीजेपी में एक बार फिर से_internal तनाव उभरकर सामने आया है। पार्टी के वरिष्ठ और सबसे अनुभवी नेता, सात बार विधायक अनिल विज इस बार नाराज हैं क्योंकि उन्हें 2024 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी द्वारा हारी गई 42 सीटों की जीत के कार्यक्रम में शामिल नहीं किया गया। इस पहल में सभी कैबिनेट मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई, सिवाय अनिल विज के, जिससे उन्होंने राज्यव्यापी पार्टी कार्यकर्ता यात्रा का एलान कर नया राजनीतिक सन्देश दिया है।
अनिल विज का कड़ा संदेश और आगामी यात्रा
अनिल विज ने स्पष्ट किया कि वे पार्टी के सबसे वरिष्ठ विधायक हैं और पूरे हरियाणा की देखरेख करेंगे। उनकी योजना है कि वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में पार्टी के पुराने और नए कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और उनकी समस्याएं सुनेंगे। साथ ही, उन्होंने सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेंगे।

पार्टी की प्रतिक्रिया और मनाने की कोशिश
पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि अनिल विज को जिम्मेदारी ना देने का कारण उनकी सेहत है, लेकिन इस बयान से अनिल विज और भी अधिक नाराज हो गए। बाद में पार्टी के अन्य नेताओं ने विज से मुलाकात कर उनका मनाना शुरू किया और उनकी बड़ी राजनीतिक छवि और लोकप्रियता की जमकर तारीफ की।
राजनीतिक परिदृश्य में अनिल विज की अहमियत
अंबाला विधानसभा क्षेत्र में अनिल विज की मजबूत पकड़ है जहां बीजेपी की स्थिति 2019 से कमजोर होती जा रही है। उनकी सक्रियता को पार्टी के लिए निर्णायक माना जाता है। अनिल विज की यात्रा न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने के लिए है बल्कि यह बीजेपी नेतृत्व को यह भी दिखाने का एक प्रयास है कि वे हरियाणा की राजनीति में कितने महत्वपूर्ण हैं।

बाकी मंत्रियों की जिम्मेदारियां
इसके मुकाबले पार्टी ने बाकी मंत्रियों को उन 42 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी है जहां बीजेपी पिछली बार सफल नहीं हो सकी। इनमें गढ़ी-सम्पला-किलोई, रोहतक, झज्जर जैसे प्रमुख क्षेत्र हैं। लेकिन अनिल विज को अलग रखने से पार्टी में असंतोष और चर्चा तेज हुई है।
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