जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में मंगलवार को छात्रसंघ चुनाव (JNUSU Elections 2025) के लिए मतदान जारी है।
सुबह 9 बजे से मतदान शुरू हुआ और शाम 5:30 बजे तक चलेगा, बीच में 1 बजे से 2:30 बजे तक लंच ब्रेक रखा गया है।
JNUSU Elections 2025: मुख्य जानकारी
कुल 9,043 छात्र इस बार वोट डालने के पात्र हैं।
मतदान खत्म होने के बाद गिनती रात 9 बजे शुरू होगी, और अंतिम परिणाम 6 नवंबर 2025 को घोषित किया जाएगा।
चार प्रमुख पदों — अध्यक्ष (President), उपाध्यक्ष (Vice-President), महासचिव (General Secretary) और संयुक्त सचिव (Joint Secretary) — के लिए इस बार कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं।
Left Unity vs ABVP: फिर आमने-सामने दो विचारधाराएं
JNU का चुनाव हमेशा से राष्ट्रीय राजनीति का आईना माना जाता है।
इस बार भी मुख्य मुकाबला Left Unity (AISA, SFI, DSF) और RSS समर्थित ABVP के बीच है।
Left Unity के उम्मीदवार:
- अध्यक्ष: अदिति मिश्रा (AISA)
- उपाध्यक्ष: किझाकूट गोपिका बाबू (SFI)
- महासचिव: सुनील यादव (DSF)
- संयुक्त सचिव: दानिश अली (AISA)
ABVP के उम्मीदवार:
- अध्यक्ष: विकास पटेल
- उपाध्यक्ष: तान्या कुमारी
- महासचिव: राजेश्वर कांत दुबे
- संयुक्त सचिव: अनुज
ABVP इस बार “Performance और Nationalism” के एजेंडे पर चुनाव लड़ रही है, जबकि Left Unity “Inclusion, Accessibility और Student Welfare” जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है।

महिला प्रतिनिधित्व में बढ़ोतरी
इस बार JNU चुनावों में महिला उम्मीदवारों की भागीदारी भी बढ़ी है —
लगभग 30% नामांकन केंद्रीय समिति के पदों के लिए और 25% स्कूल काउंसलर पदों के लिए महिला उम्मीदवारों ने दाखिल किए हैं।
पिछले साल का चुनाव परिणाम
पिछले साल AISA के नितीश कुमार ने अध्यक्ष पद पर जीत हासिल की थी, जबकि ABVP के वैभव मीणा ने संयुक्त सचिव पद जीता था।
यह जीत ABVP के लिए 10 साल बाद ऐतिहासिक वापसी मानी गई थी, जिसने JNU की छात्र राजनीति में नए समीकरण बनाए।
कैंपस में जोश और उत्साह
सुबह से ही JNU के कैंपस में लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
छात्र उत्साहपूर्वक मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, और माहौल में लोकतंत्र का जोश साफ झलक रहा है।
हर छात्र संगठन अपने-अपने पैनल के समर्थन में कैंपस में पोस्टर और नारेबाज़ी के ज़रिए माहौल बना रहा है।
Khabarnama247 Analysis
JNU चुनाव सिर्फ छात्रसंघ की राजनीति नहीं, बल्कि विचारधारा की लड़ाई है —
एक तरफ राष्ट्रवाद और परफॉर्मेंस की बात करने वाली ABVP,
और दूसरी तरफ समावेशिता, सामाजिक न्याय और छात्र हित की आवाज़ उठाने वाली Left Unity।
6 नवंबर को यह तय होगा कि JNU का सत्ता केंद्र किस विचारधारा के पास जाएगा — Left का पुराना किला बना रहेगा या ABVP फिर इतिहास दोहराएगी।





